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Showing posts from November, 2011

Maya

व्यथित काया, कण-कण में रोष-द्वेष, भय-आतंक छाया, उम्र की अफरा-तफरी, पल-पल, हर पल की बेसब्री, हे राम ! आधुनिकता ने ये कैसा खेल रचाया ? देखें कौन साथ ले जाये माया ! माया !! माया !!! - विमल 'एहसास'

Daud

अधिकारों की लम्बी कतारें कतारों में लड़ता-झगड़ता, मरता-मारता, कसमसाता इंसान इंसान के दिल में तमन्ना गाड़ी-बंगला, ये-वो, गाड़ी के गीअर बदलता तरक्की का भ्रम लिए कुछ यूं दौड़ रहा है ! कौन मुड़ कर देखे प्रदुषण में कर्त्तव्य दम तोड़ रहा है ! - विमल 'एहसास'