Maya

व्यथित काया,
कण-कण में रोष-द्वेष,
भय-आतंक छाया,
उम्र की अफरा-तफरी,
पल-पल, हर पल की बेसब्री,
हे राम !
आधुनिकता ने ये कैसा खेल रचाया ?

देखें कौन साथ ले जाये
माया ! माया !! माया !!!

- विमल 'एहसास'

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