Jajbaat
जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे,
दंग हैं आकर पहलू में तेरे
एक पल कोई नहीं अपना,
एक पल सब हैं मेरे
कोई मोल नहीं जज्बातों का,
दुनिया के बाज़ार में,
तार-तार हुए उसूल,
जब संघर्षों से हम घिरे
दंग हैं आकर पहलू में तेरे
एक पल कोई नहीं अपना,
एक पल सब हैं मेरे
जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे,
दंग हैं आकर पहलू में तेरे
कोई मोल नहीं जज्बातों का,
दुनिया के बाज़ार में,
तार-तार हुए उसूल,
जब संघर्षों से हम घिरे
जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे,
दंग हैं आकर पहलू में तेरे
- विमल 'एहसास'
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