Posts

Showing posts from August, 2014

वक़्त

तेरे गम से इत्तेफाक किसे 'एहसास' इंसान तो अब, दो निवालों की खातिर वक़्त ढूँढने लगे हैं ।।

राखी

रक्षा बंधन, बंधन नहीं ये केवल धागों का, ये बंधन है कर्तव्यों के प्रति वादों का, ईरादों का । रक्षा मानव-मानव में मिटते नेह की, ये डोरी है विश्वास की, स्नेह की ।। - सभी को बहुत-बहुत श...

कीड़ा

मैं हर शख्स में इंसान ही देखता था, आज मालूम हुआ, कीड़े तो हर दिमाग में हैं ।।

सुकूँ

मरकर भी सुकूं नहीं मेरी रूह को, कि मेरा कातिल उदास क्यूं है !!

जिंदगी

हर कदम समझौतों की जिंदगी, मैं जी तो लूं मगर, लाश अपनी कंधों पर उठाई नहीं जाती ।