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Showing posts from September, 2014

फलसफा

बहुत छोटा हूँ मैं, छोटा ही रहने दो ! जमाने की ऊँचाइयों को नाप न पाऊंगा । चढ़ते होंगे शिखरों पर, लाशों पर चलकर, ये सफ़र मैं तैय न कर पाऊंगा । इंसानी हद वफ़ा-ओ-नफरत क्या है, वफ़ा पूरी कर ल...

अल्लाह

दो पल तो मेरे मौला, मेरी हद को दे !! बदले मेरी साँसे किसी मजहब को दे ! कि मै अल्लाह पुकारूँ तो राम आए, और राम कहूं तो अल्लाह का पैगाम आए !!!