फलसफा

बहुत छोटा हूँ मैं, छोटा ही रहने दो !
जमाने की ऊँचाइयों को नाप न पाऊंगा ।

चढ़ते होंगे शिखरों पर, लाशों पर चलकर,
ये सफ़र मैं तैय न कर पाऊंगा ।

इंसानी हद वफ़ा-ओ-नफरत क्या है,
वफ़ा पूरी कर लूं तो हद है !
नफरतों की खातिर जिंदगी मैं न गवाऊंगा ।।

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