दिल्ली चुनाव
दोस्तों,
दिल्ली चुनाव परिणाम महज दिल्ली में परिवर्तन के संकेत नहीं देते वरन देश की नई राजनैतिक दिशा तय करने वाले हैं, जो इस बात से सरोकार नहीं रखते मेरा मानना है वे तब मानेंगे जब उनके लिए बहुत देर हो चुकी होगी ।
जनता ने कांग्रेस के कुशाशन का विकल्प भाजपा में खोजा मगर जब वही चेहरे वहां भी दिखते हैं तो और बेहतर विकल्प की ओर उन्मुख होना स्वाभाविक ही है । भाजपा ने कोई तीर नहीं मारा वही परम्परागत घीसा-पीटा तरीका : दूसरी पार्टियों से उधारी ले लेकर बदबूदार गुलदस्ता बनाया और संघनिष्ठ मूल विचारधारा के लोगों को हाशिए पर रखा ।
इसके साथ-साथ व्यक्तिनिष्ठ हो चुकी पार्टी भला कब तक भ्रमजाल फैलाये रख सकती थी और उस पर भी विकास के वादे के साथ सत्ता में आई पार्टी में साक्षी महाराज, साध्वी, बाबा आदित्यनाथ, भचीड नाथ, भचंड नाथ दकियानूसी बातें करते हैं तो भरोसा टूटता है । स्वयं घर बार छोड़कर दूसरों को बच्चे पैदा करने की नसीहतें देते हैं यदि इन्हें इतनी चिंता है तो क्यों न घर बसायें और जितनी मर्जी आएं बच्चे पैदा करें ।
बहरहाल तीन घंटे के श्यो का अभी एक घंटा ही बीता है मोदीजी और संघ स्क्रिप्ट पर दोबारा गौर कर लें जिसकी मास्टरी जिसमे हो उसे वही काम दें । इन बाबाओं को मठ चलाने दें, कलाकारों को अपना हुनर परदे पर दिखाने दें और योग्य लोगों को देश की कमान दें । शेष मैं तो एक वोट हूँ इतना ही कह सकता हूँ ....
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