भाषण (नेता का) :
चुनाव पूर्व तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कार्य के होने न होने की संभावनाओं को दरकिनार करते हुए एकदम विश्वास के साथ, चतुराई से, केवल कर देने की घोषणा रुपी झूठ को भाषण कहा जाता है । चुनाव पश्चात् इसे जुमला कहकर पल्ला झाड़ने की कुप्रथा को राजनीति कहते हैं मित्रों !

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