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Showing posts from July, 2015

वक़्त

वक्त आने पर मैं, वक़्त से पूछूँगा जरूर ! मैं आज भी वही हूँ, कहाँ गया तेरा गुरूर ।।

मंदिर राग

मंदिर राग 'कारण - निवारण'             पिंकसिटी में सांकेतिक चक्का जाम करने के पीछे संघ-भाजपा की जुगलबंदी सराहनीय है ! दरअसल इनके लिए ये कहावत सटीक है - 'तुझे कोई और नहीं, मुझे कोई ...

ख्वाब

एक ख्वाब बुनता हूँ, चल पड़ता हूँ ! उमंगें बाँहों में लिए, साथ अपनों का लिए चला जाता हूँ .... इंसान हूँ ठोकरें खाता हूँ,  गिरता हूँ, टूटता और बिखरता हूँ,  इंसान हूँ !  सम्भलता हूँ, फिर से चलने के लिए ........ इंसान हूँ उठता हूँ, फिर बढ़ता मंजिलों के जानिब, सम्भलता हूँ, सब फिर से सँभालने ।। फिर कोई धोखा खाता, लड़खड़ाता हूँ ............. इंसान हूँ ।। मगर मैं रुकूंगा नहीं, बाधाओं मैं हरगिज झुकूंगा नहीं यही मेरा धर्म है, खुद पर पार पाता हूँ ......... इंसान हूँ ।।।