मंदिर राग

मंदिर राग 'कारण - निवारण'
            पिंकसिटी में सांकेतिक चक्का जाम करने के पीछे संघ-भाजपा की जुगलबंदी सराहनीय है ! दरअसल इनके लिए ये कहावत सटीक है - 'तुझे कोई और नहीं, मुझे कोई ठौर नहीं' संघ अपनी स्थापना से लेकर आज तक एक लकवाग्रस्त मानसिकता का शिकार रहा है, स्वयंसेवकों को आज ये महसूस हो रहा होगा कि वो जिस भाजपा को सत्ता में स्थापित करने के लिए लड़ते रहे हैं उन्ही के सामने आज ये प्रदर्शन ???
               एक तरफ व्यापम का शोर, दूसरी तरफ मोदी जी को पद्म पुरूस्कार की सिफारिश के चर्चे ! कहीं तथाकथित राष्ट्रवादियों को अपनी छवि बनाये रखने के लिए तो ये दिखावा नहीं करना पड़ रहा ?
              अपने 20 माह अर्थात् एक तिहाई कार्यकाल के पूर्ण कर लेने के बाद भी 'सुराज' की उपलब्धियां क्या हैं, मुझे लिखने की जरूरत नहीं और न ही ऐसा कोई पैमाना मेरे पास है ! ये तो समय आने पर वही जनता तैय करेगी जिसने छप्परफाड़ समर्थन दिया था ।
               बहरहाल इस घटनाक्रम से ये स्पष्ट है कि संघ का अपने इस नालायक संगठन और नकचढ़ी सत्ता पर कोई नियंत्रण नहीं है । मगर संघ उसी तरह मजबूर है जैसे कदाचित् पितामह भीष्म ।

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