Jajbaat
जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे, दंग हैं आकर पहलू में तेरे एक पल कोई नहीं अपना, एक पल सब हैं मेरे जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे, दंग हैं आकर पहलू में तेरे कोई मोल नहीं जज्बातों का, दुनिया के बाज़ार में, तार-तार हुए उसूल, जब संघर्षों से हम घिरे जिंदगी कैसे-कैसे रंग तेरे, दंग हैं आकर पहलू में तेरे - विमल 'एहसास'