ज़ोर Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 28, 2015 गले की मालिश तबसे जोरों पर है ! जब से सुना, हमारा नाम उनकी उँगलियों के पेरवों पर है !! Read more
स्वरूचि भोज Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 11, 2015 कोरे कागज़ पर, फकत रोटी ही लिख दो ! मगर कतारों में, 'स्वरुचि भोज' बक्श दो ! Read more
आशिक Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 11, 2015 जिंदगी दो होती, एक तुझ पे लुटा देता ! एक तो गुजर जाएगी महज, रोटी के बंदोबस्त में !! - बेरोजगार आशिक '1998' Read more
Insaan Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 07, 2015 कितनी स्याही उड़ेल दी कागजों पर, मगर कुछ न बदला .... इंसान तू शैतान ही बनते चला गया ।। तिनका-तिनका बिखेरता घोंसले का, हैसियतों के तू , ये क्या ख्वाब बुनते चला गया ।। कुदरत की ताक़त क... Read more
ग़म Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 06, 2015 क्या होता यारों ग़र महफ़िल हमें मिल जाती ? ग़म ग़मगीन हो जाता, तन्हाई तन्हा रह जाती । Read more
यादें Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 04, 2015 सूख चुके हैं अश्क, भ्रम था ! जम गए थे शायद, फरेबों के तले !! साफ़ देख पाता हूँ सब ! यादों की तपिश में बरस गया जो धुंधलका सा था । Read more