कविता जो दिल को छू गई " सुरेन्द्र जी शर्मा " एक कमरा था जिसमें मैं रहता था माँ-बाप के संग घर बड़ा था इसलिए इस कमी को पूरा करने के लिए मेहमान बुला लेते थे हम! फिर विकास का फैलाव आया व...
मैंने अल्लाह-राम नहीं देखे , दगा देते इंसान देखे हैं ! सुना हैं ये उन्हीं के बन्दे हैं !! प्यार, वफ़ा, इश्क, मोहब्बत इनके फंदे हैं ।। ग़म और ख़ुशी जो मिले, कबूल है । सच के आसमां में उड़ने ...
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