यकीं

मैंने अल्लाह-राम नहीं देखे,
दगा देते इंसान देखे हैं !

सुना हैं ये उन्हीं के बन्दे हैं !!
प्यार, वफ़ा, इश्क, मोहब्बत इनके फंदे हैं ।।

ग़म और ख़ुशी जो मिले, कबूल है ।
सच के आसमां में उड़ने वाले हम आजाद परिंदे हैं ।।

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