अरविन्द जी !
अरविन्द जी को भगोड़ा कहने पर यदि उन्हें दुःख पहुँचता है तो मुझे लगता है वे शिव, राम, सुकरात, गांधी, इशु, मीरा, गुरु गोविन्द सिंह, मोहम्मद साहब आदि के बारे में कुछ भी नहीं जानते और सत्य का केवल दिखावा कर रहे हैं।
दर असल सत्य का मतलब ही गरल पीना है अरविन्द जी ! सत्य के परम आदर्श राजा हरिश्चन्द्र की तकलीफ इंसान अपनी रूह के कान खोल कर सुन भी नहीं सकता फिर उसका अनुशरण करना तो किसी दुसरे लोक की बात हो जाती है ।
दूसरा आप यह मनन करें कि आपको भगोड़ा कहने वाले कौन लोग हैं ? ये वे लोग हैं जो आज तक उस दौड़ की कल्पना तक भी नहीं पहुंचे जिस दौड़ में आपने फतह हासिल की । वे चले ही नहीं, उनका शरीर देखने में स्वस्थ प्रतीत होता है परन्तु उनकी बुद्धि लकवाग्रस्त है। उनकी बुद्धि का क्षरण किसी लकवाग्रस्त वाद ने कर लिया है बीके हुए लोग जब राम से दगा कर सकते है तो फिर आप तो इंसान हैं ।
अंतिम ये कि आपमें सत्य कहने की हिम्मत है मैं मानता हूँ परन्तु ये सत्य निपट सत्य नहीं है । जब सत्य पर राजनीति का तड़का लगाते हो तो सामने वाले राजनीति के फेर में सत्य पर यकीं नहीं कर पाते इस समस्या के समाधान के लिए आप वोट बैंक की राजनीति से ऊपर केवल और केवल देश का स्मरण करें तो मुझे लगता है ...
सत्यम शिवम् सुन्दरम !!!
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