यक्ष प्रश्न
मित्रों,
एक प्रश्न सदैव कचोटता है । चुनाव आते ही सबको अपनी जाति, धर्म इत्यादि-इत्यादि याद आ जाते हैं जबकि शादी में कोई यह नहीं कहता मैं अमुक जाति के व्यक्ति को नहीं बुलाऊंगा । मैयत में कोई नहीं कहता, व्यापारी यह नहीं कहता अमुक जाति के साथ व्यापार नहीं करूंगा ।
सफ़र में यह नहीं देखता कि क़िस जाति का चालक है या पायलेट है । चालक यह नहीं देखता किस कौम की सवारी उसकी गाडी में बैठी है ।
फिर दिमाग में ये भूसा भरने वाले कौन हैं ?
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