धर्म
सूक्ष्म आध्यात्मिक चिंतन तो यही है कि इंसान की उत्पत्ति एक बहुत बड़ी प्राकृतिक घटना है । कालांतर में अपने-अपने दिमाग दौड़ते गए, सिद्धांत प्रतिपादित होते गए । परन्तु कोई सिद्धांत अपने आप में परिपूर्ण नहीं है, स्वयं को श्रेष्ठ घोषित करने की प्रवृति व्यक्ति में सदियों से चली आई है । सत्य की खोज में निकले महापुरुषों को उनके पश्चात्वृत्ति अनुयाइयों ने एक संकीर्ण दायरे में रख दिया विभिन्न धर्म उसी का परिणाम हैं ।
यही धर्म आगे चलकर इंसानी भेद और महत्वाकांक्षी लोगों के लिए सत्ता पाने का हथियार बन गए ।
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