परिपाटी

मित्रों,
       नेता, धर्म गुरु, बड़े-बड़े ज्ञाता इस बात में टाइम पास कर रहे हैं कि मोदी को टोपी व मदनी को तिलक लगाना चाहिए क्या ?
कबीरा बेचारा मर गया समझाते-समझाते मगर कमबख्त इंसान को समझनी नहीं तो कोई क्या करे । पेशा बना रखा है, काम करने में मेहनत करनी पड़ती है बयानबाजियों से धंधा चले तो क्या हर्ज़ है।
मित्रो, युगों बीत गए मानव इतिहास को माथे पर टीका रगड़ते, चोटी रखते, सुन्नत करते मगर आज तक प्रकृति इन चीजों को स्वीकार नहीं कर रही, अन्यथा यह परम्परा न रहकर आनुवंशिकता में तब्दील हो गई होती ।
खैर .. क्या ज्यादा समझाना
क्रांतिवीर हिंदी फिल्म के ये बोल इंसानी मिजाज पर एकदम सटीक हैं -
"ऊपर वाले ने खूबसूरत चीज बनाई थी इंसान, नीचे देखा कीड़े बन गए कीड़े, रेंगते रहो ...... "
विमल 'एहसास'

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