Insaan

कितनी स्याही उड़ेल दी कागजों पर,
मगर कुछ न बदला ....
इंसान तू शैतान ही बनते चला गया ।।

तिनका-तिनका बिखेरता घोंसले का,
हैसियतों के तू ,
ये क्या ख्वाब बुनते चला गया ।।

कुदरत की ताक़त कहूं या भोलापन तेरा,
मौत आईना है तेरा ........
वरना आईने को तू आईना दिखाते चला गया ।।

कितनी स्याही उड़ेल दी कागजों पर,
मगर कुछ न बदला ....
इंसान तू शैतान ही बनते चला गया ।।
- 'एहसास'

Comments

Popular posts from this blog

वसुंधरा जी !

Daud