पंचायत
दोस्तों,
हमारी ग्राम पंचायत बेवड के तहत 4 गाँव आते हैं - बेवड, भोजान, बास भारीण्ड, बांगड़वा जिसमें 4 वर्ष पूर्व तक किसी भी गाँव में खेल मैदान नहीं, शमशान भूमि नहीं, छोटे-बड़े 9 स्कूल में से 4 स्चूलों में चार दिवारी तक नहीं थी जिससे उन स्चूलों में पढाई तो दूर की बात, सांस लेना तक दूभर था । अशिक्षित वर्ग के लोग उन स्थानों पर आकर शौच निवृति करते, ये सब स्थिति देखकर बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती थी ।
अपनी धर्मपत्नी के चार साल के सरपंच कार्यकाल के दौरान मैं लोगों को व्यक्तिगत लाभ पहुँचाने में तो बहुत ज्यादा सफलता हासिल न कर सका क्योंकि लोगों की इच्छापूर्ति नामुमकिन हैं परन्तु क्या अच्छे वातावरण के स्कूल, गलियां, रोशन रास्ते, शमशान में दो घडी चैन से बैठने और पीने के पानी की सुविधाएँ, सारी सुविधायुक्त कार्यालय क्या ये सब जनता के हक़ में नहीं हैं । हाँ दोस्तों ये सब मैंने बहुत मन से किया है और इस बात की मुझे आत्मिक ख़ुशी है।
लोगों की संकीर्ण मानसिकता को उठाने में अभी और वक्त लगेगा, इर्ष्या और स्वार्थ गाँव में गहरी जड़ जमा चुके हैं क्या करना चाहिए ? कोई मशविरा ....
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