मोदी जी
आदरणीय मोदी जी !
मेरा संबोधन श्रद्धेय मोदी जी होने वाला था, परन्तु राजनीति ने एक बार पुनः अपना असर दिखाया और आप संघ के अनुशाषित स्वयंसेवक होते हुए भी वो कह गए जो (मुझे लगता है) टाला जा सकता था ।
सद्भावना मिशन के दौरान आप वोट बटोरने की राजनीति से ऊपर कुछ करेंगे ऐसा आपके व्यवहार से लगा और एक वक्तव्य में आपने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक पत्रकार ने आपसे पूछा कि आपने गुजरात के अल्पसंख्यक समुदाय के लिए क्या किया तो आपका जवाब मेरे अंतर्मन को छू गया । आपका जवाब था "गुजरात में मैंने न बहु संख्यक के लिए कुछ किया और न अल्पसंख्यक के लिए, मैंने जो किया वो 5 करोड़ गुजरातियों के लिए किया ।"
ये शब्द भारत की बदलती राजनीति की ओर इशारा कर रहे थे परन्तु भाजपा द्वारा आपको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद जिस प्रकार हर एक रीति-नीति की बागडोर जैसे आप ही के हाथ में थी और सारे फैसलों पर आपकी मुहर भी थी । इन सब बातों के पश्चात विश्वासहीनता की कमी आप में स्पष्ट जान पड़ रही थी, एक के बाद एक आपके सिपहसालारों द्वारा बयानबाजियां ? और इन सब पर आपकी टाल-मटोल प्रवृति ? और इन सब के पश्चात आपकी हताशा आपके जातिगत वक्तव्य के रूप में प्रकट हुई । इन सब घटनाओं से मैं आहत हूँ । आप जैसा कर्मयोगी भी आखिर जातिवाद के आगे हार ही गया !
मोदी जी ! आप सोशल मीडिया के प्रचार माध्यम का लाभ उठाने में अग्रणी रहे हैं, इसका असर स्पष्ट जान रहा हूँ । आपके बारे में बहुत सारी दन्त कथाएं सुनी-पढ़ी हैं, मेरा ख़याल रखना । कोई भूल हो जाए तो माफ़ कर दीजिएगा । इश्वर ने एक लाईलाज रोग लगा दिया है सत्य वर्णन का । कोई लाख समझाए मेरे ये सब समझ नहीं आता !
अंत में इतना ही कि आपके चाटुकार, आपके अवसरवादी प्रशंशक आपको सत्य का भान नहीं होने देंगे, जरा संभल के ।
जय हिन्द ! जय भारत !!
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