अभिनव पंचायत सेवा
पंचायती राज :
'राज' मतलब क्या ? राज अर्थात रहस्य ! या फिर राज का अर्थ हुकूमत से है ।
बिलकुल ! राजस्थान में ग्रामीण विकास के नाम पर अब तक पंचायत शासन केवल राज ही रहा है, कोई सुदृढ़ व्यवस्था कायम नहीं हो सकी है ।
'अभिनव राजस्थान' में ग्रामीण विकास के लिए जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना बनाई जाएगी ।
एक तरफ सत्ता विकेंद्रीकरण को महत्व की बात और दूसरी तरफ लकवाग्रस्त पंचायत व्यवस्था । केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जाने वाली राशि के उपयोग पर पाबंदियों की भरमार ।
गंभीरता से देखें तो ग्राम पंचायत को अपनी प्राथमिकताएँ तय करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं दिया गया है । सरकारें आती हैं ज़ाती हैं, नए-नए भवन निर्माण कभी पंचायत भवन कभी राजीव गांधी भारत निर्माण सेवा केंद्र और कभी नाम बदलकर अटल सेवा केंद्र ! इन सब से आम ग्रामीण को हासिल क्या हुआ ?
जिस सरपंच को जनता पंचायत के नीति निर्धारण और उसके क्रियान्वयन के लिए चुनती है वही सरपंच पंचायत समितियों में झोला उठाए कागजों के बोझ तले दबा एक बाबू ग्रामसेवक या चपरासी बनकर रह जाता है क्योंकि आजादी के इतने सालों बाद सरकारी स्कूल में एक बच्चे पर 10 हजार का खर्च प्रति माह किया जा सकता है परन्तु पूरी पंचायत की व्यवस्था के लिए पर्याप्त स्टाफ आज भी उपलब्ध नहीं है ।
पंचायत की सुचारू व्यवस्था के लिए प्रथम आवश्यकता स्टाफ की है जिससे केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों और पंचायत की नीतियों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके ।
साधारण से कार्य के लिए पटवारी, ग्रामसेवक और सरपंच की मुख्यतः आवश्यकता रहती है लेकिन तीनों तीन दिशा में होने के कारण ग्रामीण भटकते रहते हैं। इसमें दोष भी किसीका नहीं है पटवारी पर कार्यभार तीन-तीन पंचायत का, अधिकाँश ग्रामसेवक दुसरे विभागों से आए हैं जो कि पंचायत कार्य प्रणाली शिक्षित नहीं हैं और उस पर भी आए दिन सूचना का अधिकार, पंचायत समिति मीटिंग और अन्य शिविरों आदि का प्रशासनिक बोझ । सरपंच एक निश्चित समयावधि के लिए बनता है जब तक वह कार्य प्रणाली में पारंगत हो पाता है तब तक कार्यकाल समाप्त हो जाता है ।
दूसरा शोषित और गरीब तक लाभ पहुँचाने के लिए उनसे सम्बंधित योजनाओं को कहीं न कहीं राजनीति से मुक्त करना होगा । आम तौर पर देखा गया है कि bpl के मापदंडों का मखौल उड़ाया जाता है ।
'अभिनव राजस्थान' की 'अभिनव पंचायत सेवाओं' में ग्रामीण जन भटकेंगे नहीं, साधारण से काम महीनों अटकेंगे नहीं ।
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