पंचायत

साक्षरा: विपरिताश्चेत एव केवलं राक्षसा:

ऐसा पढ़ा था, अब महसूस कर रहा हूँ कि कैसे गाँव के कुछ पढ़े लिखे नौजवान अपने क्षुद्र स्वार्थों के लिए भोली-भाली जनता को गुमराह कर रहे हैं । भविष्य को लेकर कोई योजना इनके पास नहीं है केवल धन प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं । येन केन प्रकारेण ।

निर्मल भारत अभियान के तहत -
पंचायत में कुल स्वीकृत शौचालयों की संख्या 399
निरस्त स्वीकृतियां - 30
चालू स्थिति में - 82
पूर्ण भुगतान - 54
निर्मल भारत को स्वच्छ भारत करने के लिए निरस्त स्वीकृतियां - 231 अब इनको एक मुश्त 12000₹ सीधे चेक द्वारा प्राप्त होंगे । नरेगा का चोचला हटा दिया गया है जिसके लिए सरकार को धन्यवाद ।
2 लाभार्थियों के चैक पंचायत के पास उपलब्ध हैं ।

अफवाह उड़ाई गई कि पूरी पंचायत के शौचालय स्वीकृत हुए थे  जिनका पैसा सरपंच डकार गया । और रही सही कसर एक भ्रष्ट-चरित्रहीन अधिकारी ने पूरी कर दी जो इनका भी बाप है ।

जरूरत से ज्यादा होशियार मगर अक्ल के अंधे सरपंच उम्मीदवार 3 महीने पहले ही शराब और अफवाहों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने में लगे हैं ।
बड़े नेताओं की चाटुकारिता मात्र से देश का भला होने वाला नहीं है, संभल जाओ ।

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