पानी
राजनैतिक दलों का एकमात्र ध्येय चुनाव में जीत ही होता है इसके अतिरिक्त उनकी कोई विचारधारा नहीं है, आम आदमी की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है ।
कबूतर को कौवा बताओ चमचागिरी करो पद पाओ, टिकेट पाओ कुछ बन जाओ अपनी अमीरी और शान बढाओ ।
यदि ऐसा न होता तो 70 सालों में बड़ी-बड़ी घोषणाओं के अलावा देश के हर इंसान को रोजगार न सही, न्याय न सही, बिजली-शिक्षा न सही, सड़कें-यातायात के साधन न सही तो न सही कम से कम स्वच्छ पेयजल का अधिकार तो मिलना ही चाहिए था ।
हम बुलेट चलाने की बात करते हैं आज तक वो बिना कहे भी चलती रही हैं हर घर में स्वच्छ पीने का पानी पहुँच जाए, माताएं-बहनें सर पर पानी के बोझ से बच जाए, अधिकांश बीमारियाँ मिट जाएं तो शायद उन्हें शिक्षा के लिए कुछ वक़्त और मिल जाए ।
इस देश में कितने ही अभियान चलाये गए और कुछ लक्ष्य तक पहुंचे भी, मैं अपेक्षा करूंगा देश की सरकार से जो स्मार्ट शहरों और बुलेट ट्रेन की बातें करती है। वो एक 'घर-घर जल योजना' लाए और पानी ढोने की परम्परा से महिलाओं को मुक्ति दिलाए ।।
।। जब तक न पहुंचे घर-घर पानी, सारी बातें बेईमानी ।।
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