एहसास

ये दुनिया बहुत छोटी है
कोई हिन्दू है तो कोई मूसलमा
और क्या कहूं कैसे-कैसे अरमां
'एहसास'
तू अकेला है मजलिश में
सोच तो ले क्या है करना ।।

Comments

Popular posts from this blog

वसुंधरा जी !

Daud