चुनाव आयोग

माननीय मुख्य चुनाव आयुक्त,
          प्रणाम ! आपके आयोग के बारे में तब से जानने लगा हूँ जबसे शेषन साहब ने इसे संभाला था। चुनाव सुधार का आज का परिदृश्य उनके ही कठोर निर्णयों का सुपरिणाम है ।
          आज फिर एक कठोर परन्तु निर्णायक सुधार की गहन जरूरत आन पड़ी है, आप भली प्रकार जानते हैं कि लोकतंत्र की प्रथम सीढ़ी ग्राम पंचायत है । इसके चयन की सफल और कम खर्चीली प्रक्रिया से बहुत हद तक भ्रष्टाचार कम किया जा सकेगा ।
            उच्च पदों पर आसीन राजनेता, अफसर पंचायतों को बहुत हलके में लेकर चलते हैं जबकि जो योजनाएं ऊपर से लागू की जाती हैं या यूं कहें थोपी जाती हैं उन्हें प्रत्यक्ष रूप से उस अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का काम ग्राम पंचायतें ही करती हैं। चुनाव सुधार हेतु मेरा आग्रह :-
1. ग्राम पंचायतों के चुनाव में ठीक उसी प्रकार मोनिटरिंग हो जैसी कि विधायक या सांसद चुनाव में होती है, चुनाव के दौरान आबकारी विभाग को और मुस्तैद किया जाए और हो सके तो एक माह के लिए शराब बंदी पूरे प्रदेश में की जाए जिससे धनी प्रत्यासी शराब के दम पर वोट न पा सके।
2. प्रत्यासी के नामांकन में पूर्ण एहतियात बरता जाए किसी प्रकार की कोई कोताही न बरती जाए अर्थात दो दिन नामांकन हेतु और एक दिन नाम वापसी हेतु जिससे कि प्रत्यासी के नामांकन आवेदन की भली प्रकार जांच-पड़ताल हो सके । चुनाव चिन्ह कम से कम पांच दिन पूर्व मिले जिससे प्रत्यासी को प्रचार का पर्याप्त समय मिल सके ! प्रत्यासी की चल-अचल सम्पति एवं किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि का पूर्ण ब्यौरा हो ।
3. evm का इस्तेमाल किया जावे जिससे कि नजदीकी मुकाबलों में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी की आशंका न रहे और परिणाम भी शीघ्र घोषित हों, देर रात लड़ाई-झगड़ों का डर न रहे ।
4. जितनी व्यय राशि उचित समझी जाए, उतनी राशि आयोग द्वारा स्वयं एक निर्धारित अंकों के नोटों के रूप में प्रत्यासी को बदल कर दी जावे इसके अतिरिक्त चुनाव समय के दौरान प्रत्यासी के पास अन्य राशि मिलना पूर्णतः प्रतिबंधित हो । खरीद-फरोख्त कर चुनाव जीतना ही भ्रष्टाचार की प्रथम अंगडाई है । शेष आप ज्यादा समझदार हैं ।

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