कॉलेज
दोस्तों,
मेरे एक संघ मित्र का आग्रह था कि राजगढ़ राजकीय महाविद्यालय के लिए पुरजोर कोशिश करनी चाहिए। विचार किया तो ध्यान में आया -
जिस क्षेत्र में बहुतायत किसान असिंचित कृषि पर निर्भर है और रोजगार के कोई ठोस संसाधन भी नहीं हैं, तो ऐसे में जहाँ गरीब किसान पुत्र करीबन 50000₹ में स्नातक शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं या अभाववश नहीं कर पाते हैं।
वही शिक्षा यदि राजकीय महाविद्यालय के माध्यम से महज 5000₹ तक में प्राप्त हो सकती है तो फिर राजगढ़ इस लाभ से वंचित क्यों है ? इस सम्बन्ध में पूर्व सरकार ने अपने अंतिम समय में निर्णय लिया, जिसे वर्तमान सरकार आर्थिक अभाव के बहाने टालने के मूड में है ।
जब केंद्र में अटलजी की टूटी-फूटी सरकार थी और राज्य में विरोधी सरकार तो एक बहाना था कि क्या करें, परन्तु आज एक मजबूत बहुमत की और एक दिशा में चलने वाली सरकारें केंद्र और राज्य में हैं फिर भी क्या इस अहम् कार्य के लिए संघ अपनी ही कोख से जन्मीं सरकारों की तरफ मूंह ताकेगा ? अन्य कई मुद्दे तो फिर भी विवादास्पद कहकर टाले जा सकते हैं परन्तु यह तो सीधे-सीधे शिक्षा से जुड़ा हुआ है, इसमें किसी प्रकार की राजनीति की संभावना नहीं होनी चाहिए ।
अंत में मैं अपनी घृणित सोच भी व्यक्त कर ही देता हूँ, मुझे लगता है कि राजकीय कॉलेज खुलने से शिक्षा व्यवसाय के निजी संस्थानों को भारी नुक्सान हो सकता है तो कहीं जुबाँ और कलम खरीद तो नहीं ली गई हैं ...!!!!????????
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