इंकलाब जिंदाबाद
दोस्तों राजनीति केवल सक्षम और सामर्थ्यवान जनता के लिए सुविधाएं जुटाने का काम करती है इससे अलग जो वर्ग है उसको भीख देकर तुष्टीकरण का नाटक करती है !
छोटी सी उदाहरण के तौर पर मैं कहूं तो जैसे सरकारी कर्मचारी हैं आप देखते होंगे की नेता लोग अक्सर उनके तबादलों की माथापच्ची में ही लगे रहते हैं दूसरा थाने कचहरी में लड़ने वाले लोगों के लिए किसी एक पक्ष का पक्षधर बनकर खड़े होना और भूमाफियाओं शराब माफियाओं या फिर अनर्गल व्यापार करने वाले लोगों का साथ कोई ना कोई पार्टी या कोई ना कोई नेता जरूर देता है परंतु जहां आमजन के विकास उसकी सुविधाओं की बात आती है तो कोई एक योजना लागू कर दी जाती है और जिस में नियमों का जाल बिछा दिया जाता है जिस आदमी को सुविधाएं मिलनी है वह अनपढ़ है सिस्टम से अनजान है और उस की आड़ में भी यही उच्च वर्ग चाहे वह राजनीतिक हो और चाहे वह प्रशासनिक सिस्टम हो वह कहीं ना कहीं अपने हित साधता है और इनको सुविधाओं के नाम पर अपने वोट बैंक में तब्दील करता है
दोस्तों राजनीति केवल सक्षम और सामर्थ्यवान जनता के लिए सुविधाएं जुटाने का काम करती है इससे अलग जो वर्ग है उसको भीख देकर तुष्टीकरण का नाटक करती है !
छोटी सी उदाहरण के तौर पर मैं कहूं तो जैसे सरकारी कर्मचारी हैं आप देखते होंगे की नेता लोग अक्सर उनके तबादलों की माथापच्ची में ही लगे रहते हैं दूसरा थाने कचहरी में लड़ने वाले लोगों के लिए किसी एक पक्ष का पक्षधर बनकर खड़े होना और भूमाफियाओं शराब माफियाओं या फिर अनर्गल व्यापार करने वाले लोगों का साथ कोई ना कोई पार्टी या कोई ना कोई नेता जरूर देता है परंतु जहां आमजन के विकास उसकी सुविधाओं की बात आती है तो कोई एक योजना लागू कर दी जाती है और जिस में नियमों का जाल बिछा दिया जाता है जिस आदमी को सुविधाएं मिलनी है वह अनपढ़ है सिस्टम से अनजान है और उस की आड़ में भी यही उच्च वर्ग चाहे वह राजनीतिक हो और चाहे वह प्रशासनिक सिस्टम हो वह कहीं ना कहीं अपने हित साधता है और इनको सुविधाओं के नाम पर अपने वोट बैंक में तब्दील करता है
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