मालिक चमचमाती धूप
और
दमघोटू ऊमस में,
थोड़ी सी रोशनी की
बहुत अधिक कीमत लिए,
कतारों में खड़ा है !!
उधर बेशर्म मुनीम कुर्सी पर बैठा,
खैनी पर जीभ लपलपाता
चिल्लर न होने के बहाने,
दो-पांच अनकही भीख लेता हुआ,
पंखे-कूलर में अंगड़ाई भर रहा है ....
देखो मेरे देश का अजब लोकतंत्र -----
लोक लुट रहा है
और
तंत्र लूट रहा है ......

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