आपबीती

तर्कों और कुतर्कों के बीच आखिर मेरा देश बदल तो रहा ही है, देश यूं तो हजारों साल का है और संस्कृति अनादिकाल से है मगर बेड़ियों से मुक्त हुए मेरे भारत को 70 साल हुए हैं इस लिहाज से बूढ़ा कहूँ कि युवा ? आज तक नहीं समझ पाया मगर 38 के हो गए हैं हम 39 के रास्ते में हैं, किसी विश्लेषणकर्ता ने बताया सबसे युवा देश भारत है तो हम अपनी सी उम्र का मान लेते हैं।
         राजनीति कभी अपने रूचि का विषय नहीं रहा सो विज्ञानं और गणित में उलझ गए कभी π और अल्फ़ा बीटा गामा समझ नहीं आया रट्टा लगाकर 12 पास किया तो मन में बैचेनी सी रहती थी कि साला लानत है अपनी जिंदगी,  में भी ठगी हो गई अरुचि के   पहुंचे फिर गच्चा खा गए अब किस्मत से एक गलती हो गई स्नातक के आवेदन भी भरने न आए तो मजबूरन हिन्दी से पूरी भेंट हो गई और दिल लगा बैठे सो हमारी नैया पार हुई ।
राजनैतिक परिवार से हैं तो रोज सरकारी मुलाजिमों को हाथ में एक कागज़ लिए देखते आए हैं, न मालूम करने पर भी पता चल जाता था कि ये स्थानांतरण की अर्जी है, देख-देखकर ही उकता गए ठान लिया सरकारी तो बिल्कुल नहीं

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