Posts

Showing posts from 2015

वक़्त

वक्त आने पर मैं, वक़्त से पूछूँगा जरूर ! मैं आज भी वही हूँ, कहाँ गया तेरा गुरूर ।।

मंदिर राग

मंदिर राग 'कारण - निवारण'             पिंकसिटी में सांकेतिक चक्का जाम करने के पीछे संघ-भाजपा की जुगलबंदी सराहनीय है ! दरअसल इनके लिए ये कहावत सटीक है - 'तुझे कोई और नहीं, मुझे कोई ...

ख्वाब

एक ख्वाब बुनता हूँ, चल पड़ता हूँ ! उमंगें बाँहों में लिए, साथ अपनों का लिए चला जाता हूँ .... इंसान हूँ ठोकरें खाता हूँ,  गिरता हूँ, टूटता और बिखरता हूँ,  इंसान हूँ !  सम्भलता हूँ, फिर से चलने के लिए ........ इंसान हूँ उठता हूँ, फिर बढ़ता मंजिलों के जानिब, सम्भलता हूँ, सब फिर से सँभालने ।। फिर कोई धोखा खाता, लड़खड़ाता हूँ ............. इंसान हूँ ।। मगर मैं रुकूंगा नहीं, बाधाओं मैं हरगिज झुकूंगा नहीं यही मेरा धर्म है, खुद पर पार पाता हूँ ......... इंसान हूँ ।।।

फ़साना

ख़ामोशी से ये फ़साना कह गए, फिर न आने का बहाना कह गए !

चश्मा

बाजार से चन्द खुशियाँ ... खरीद लाया हूँ, प्लास्टिक की शक्ल में हैं कुछ, कुछ सोने की सूरत में हैं । बीवी खुश है, बच्चे खुश तो मैं भी खुश क्यूं न हूँ ? एक चश्मा ले आया हूँ, कुछ दवाएं भी । अब और टुकडे बटोरूंगा, कागज़ के .. ये टुकड़े सबको खुशियाँ बांटते हैं ।। माँ-बाप ने कुछ नहीं माँगा, उनसे भी कुछ पूछा मैंने, कांपते हाथ, बस यही कह रहे थे, बेटा हमें बस तुम्हारी ख़ुशी चाहिए ! ह ह ह !!! वो तो मैं चश्मा ले ही आया हूँ आधुनिकता का  !!!

वतन पर मरने वालों

उरूजे कामयाबी पर कभी हिन्दोस्ताँ होगा । रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियाँ होगा ।। चखाएँगे मज़ा बर्बादिए गुलशन का गुलचीं को, बहार आ जाएगी उस दम जब अपना बाग़बाँ होगा ।। ये आए दिन की छेड़ अच्छी नहीं ऐ ख़ंजरे क़ातिल पता कब फ़ैसला उनके हमारे दरमियाँ होगा ।। जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दे वतन हरगिज़, न जाने बाद मुर्दन मैं कहाँ औ तू कहाँ होगा ।। वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है, सुना है आज मक़तल में हमारा इम्तिहाँ होगा ।। शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले । वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा ।। कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे । जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमाँ होगा ।।  - अभिनव भारत अभियान

ज़ोर

गले की मालिश तबसे जोरों पर है ! जब से सुना, हमारा नाम उनकी उँगलियों के पेरवों पर है !!

स्वरूचि भोज

कोरे कागज़ पर, फकत रोटी ही लिख दो ! मगर कतारों में, 'स्वरुचि भोज' बक्श दो !

आशिक

जिंदगी दो होती, एक तुझ पे लुटा देता ! एक तो गुजर जाएगी महज, रोटी के बंदोबस्त में !! - बेरोजगार आशिक '1998'

Insaan

कितनी स्याही उड़ेल दी कागजों पर, मगर कुछ न बदला .... इंसान तू शैतान ही बनते चला गया ।। तिनका-तिनका बिखेरता घोंसले का, हैसियतों के तू , ये क्या ख्वाब बुनते चला गया ।। कुदरत की ताक़त क...

ग़म

क्या होता यारों ग़र महफ़िल हमें मिल जाती ? ग़म ग़मगीन हो जाता, तन्हाई तन्हा रह जाती ।

यादें

सूख चुके हैं अश्क, भ्रम था ! जम गए थे शायद, फरेबों के तले !! साफ़ देख पाता हूँ सब ! यादों की तपिश में बरस गया जो धुंधलका सा था ।
भाषण (नेता का) : चुनाव पूर्व तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कार्य के होने न होने की संभावनाओं को दरकिनार करते हुए एकदम विश्वास के साथ, चतुराई से, केवल कर देने की घोषणा रुपी झूठ को ...

दुनिया

परवाह तुझे तेरी ही न रही, 'ए ह सा स' तभी तो ! ये दुनिया भी ते री न रही !

दिल्ली चुनाव

दोस्तों,        दिल्ली चुनाव परिणाम महज दिल्ली में परिवर्तन के संकेत नहीं देते वरन देश की नई राजनैतिक दिशा तय करने वाले हैं, जो इस बात से सरोकार नहीं रखते मेरा मानना है वे तब ...

पंचायत

साक्षरा: विपरिताश्चेत एव केवलं राक्षसा: ऐसा पढ़ा था, अब महसूस कर रहा हूँ कि कैसे गाँव के कुछ पढ़े लिखे नौजवान अपने क्षुद्र स्वार्थों के लिए भोली-भाली जनता को गुमराह कर रहे हैं ...

पंचायत चुनाव 1

ग्राम पंचायत बेवड के फेसबुक मित्रों से : दोस्तों,      पिछले पंचायत चुनाव में परिस्थितिवश मेरी धर्मपत्नी का सरपंच उम्मीदवार बनना और फिर आप सब के स्नेह-प्यार से उसका निर्व...

अटल जी

अटल जी के शब्दों में : क्या हार में, क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं !! कर्तव्य पथ पर जो मिला, ये भी सही, वो भी सही !! कर्तव्य पथ पर सब स्वीकार । अब चाहे जीत मिले या हार ।।

अभिनव पंचायत सेवा

पंचायती राज : 'राज' मतलब क्या ?  राज अर्थात रहस्य ! या फिर राज का अर्थ हुकूमत से है । बिलकुल ! राजस्थान में ग्रामीण विकास के नाम पर अब तक पंचायत शासन केवल राज ही रहा है, कोई सुदृढ़ व्य...