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Showing posts from April, 2014

ए हसास इल्म

शिद्दत से महसूस कर खुद को,           ए              ह                सा                    स खुदा से कोई शिकवा न रहेगा ।

लोकतंत्र

जब से राजनैतिक समझ पैदा हुई है मुझे यह साफ़ तौर पर नजर आने लगा है कि जिस प्रकार का राजनैतिक परिवेश हमारे देश का है उसमें कहने को तो आप एक स्वतंत्र देश के नागरिक हो और आपको भी चुन...

सियासत

तूफानों का खौफ किसे, हम क़यामत का हुनर रखते हैं ।। दिल में मोहब्बत वतन की, मर-मिट जाने का जिगर रखते हैं ।। मंदिर-मस्जिदों की दरकार नहीं, हम जहन में इंसानी मजहब रखते हैं ।। नफरत प...

धर्म

सूक्ष्म आध्यात्मिक चिंतन तो यही है कि इंसान की उत्पत्ति एक बहुत बड़ी प्राकृतिक घटना है । कालांतर में अपने-अपने दिमाग दौड़ते गए, सिद्धांत प्रतिपादित होते गए । परन्तु कोई सिद...

सोच

शाजिया ने आज ये कह दिया, कल गिरिराज ने वो कह दिया था .... जाने दो यार अपना ध्यान अपने काम और राष्ट्र निर्माण पर लगाओ । ये क्रिकेट टीम के वो गेंदबाज हैं जिन्हें अपनी योग्यता पर यकी...

खुदगर्ज

तमन्नाओं की भीड़ में, कितना खुदगर्ज बन गया मैं खुदा । एक आरजू करके पूरी, सुलाता तू मुझे । दर पर सुबह फिर आ गया मैं खुदा ।। हर सजदे में दुआ मांगता हूँ, उनके लिए जो कभी मेरे न होंगे, ...

परिपाटी

मित्रों,        नेता, धर्म गुरु, बड़े-बड़े ज्ञाता इस बात में टाइम पास कर रहे हैं कि मोदी को टोपी व मदनी को तिलक लगाना चाहिए क्या ? कबीरा बेचारा मर गया समझाते-समझाते मगर कमबख्त इंस...

हिंदी फॉण्ट

भाई यदि आपके पास एंड्राइड मोबाइल है तो 1. गूगल प्ले स्टोर से just hindi download करो । 2. Instal करें । 3. Settings में जाकर input language में just hindi select करें। 4. Key board पर विकल्प आ जायेगा, रोमन में type करो हिंदी आ जाएगी ।

अरविन्द जी !

अरविन्द जी को भगोड़ा कहने पर यदि उन्हें दुःख पहुँचता है तो मुझे लगता है वे शिव, राम, सुकरात, गांधी, इशु, मीरा, गुरु गोविन्द सिंह, मोहम्मद साहब आदि के बारे में कुछ भी नहीं जानते और ...

यकीं

मैंने अल्लाह-राम नहीं देखे , दगा देते इंसान देखे हैं ! सुना हैं ये उन्हीं के बन्दे हैं !! प्यार, वफ़ा, इश्क, मोहब्बत इनके फंदे हैं ।। ग़म और ख़ुशी जो मिले, कबूल है । सच के आसमां में उड़ने ...

नेता

कितना देश भक्त हैं नेता, टिकट के करोड़ों देता । वोट के हजारों .... कितना घूमता दर-दर, मंदिरों-मंदिरों, मजारों-मजारों, क्यों भाई ? कुछ सोचो कुछ विचारो ।

यक्ष प्रश्न

मित्रों,      एक प्रश्न सदैव कचोटता है । चुनाव आते ही सबको अपनी जाति, धर्म इत्यादि-इत्यादि याद आ जाते हैं जबकि शादी में कोई यह नहीं कहता मैं अमुक जाति के व्यक्ति को नहीं बुलाऊ...

FB

फेसबुक पर किसी भी टिपण्णी का सुखद पहलु ये है कि इस पर हुई बहस या तर्क एक तथ्य के रूप में दस्तावेज बन कर रहेंगे इसमें आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती । इसी को ध्यान में रखकर मै...

हस्ती

युगों बीते अल्लाह-राम समझने समझाने में । मजहब की ये दीवारें, अब तो ढह जाने दो ।। धन-दौलत, घर-परिवार, जाति-धर्म का रोना हुआ बहुत । दो कतरे अब, देश पर बह जाने दो ।। मिट गए ताज-औ-तख़्त, ...