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फलसफा

बहुत छोटा हूँ मैं, छोटा ही रहने दो ! जमाने की ऊँचाइयों को नाप न पाऊंगा । चढ़ते होंगे शिखरों पर, लाशों पर चलकर, ये सफ़र मैं तैय न कर पाऊंगा । इंसानी हद वफ़ा-ओ-नफरत क्या है, वफ़ा पूरी कर ल...

अल्लाह

दो पल तो मेरे मौला, मेरी हद को दे !! बदले मेरी साँसे किसी मजहब को दे ! कि मै अल्लाह पुकारूँ तो राम आए, और राम कहूं तो अल्लाह का पैगाम आए !!!

वक़्त

तेरे गम से इत्तेफाक किसे 'एहसास' इंसान तो अब, दो निवालों की खातिर वक़्त ढूँढने लगे हैं ।।

राखी

रक्षा बंधन, बंधन नहीं ये केवल धागों का, ये बंधन है कर्तव्यों के प्रति वादों का, ईरादों का । रक्षा मानव-मानव में मिटते नेह की, ये डोरी है विश्वास की, स्नेह की ।। - सभी को बहुत-बहुत श...

कीड़ा

मैं हर शख्स में इंसान ही देखता था, आज मालूम हुआ, कीड़े तो हर दिमाग में हैं ।।

सुकूँ

मरकर भी सुकूं नहीं मेरी रूह को, कि मेरा कातिल उदास क्यूं है !!

जिंदगी

हर कदम समझौतों की जिंदगी, मैं जी तो लूं मगर, लाश अपनी कंधों पर उठाई नहीं जाती ।