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दिल

मैं तो कुछ भी न था, न हूँ, न रहूँगा ! 'ए ह सा स' ये दुनिया क्यूं करती है मैं, मैं, मैं ।।

वसुंधरा जी !

वसुंधरा जी,               धोक द्यूं ! मैं सुण्यो है क थारी धोक खाण स्यूं टिकट मिलै, बडा-बडा मंत्री पद मिलै और तो और चुटकी बजताणी कोई अटकेड़ो काम भी झट-पट बण ज्यावै । थारी महिमा कुण...

धर्म

वो मुस्लिम बना गए, ये हिन्दू बनाएँगे । ये आँखें खोजती उनको, जो हमें इंसान बनाएँगे ।। जीना जो खुद ना सीख सके, क्या जीने का अंदाज बताएँगे ?

अंदाज

जीने के अंदाज बदलेंगे नहीं  मेरे, 'एहसास' गम जो चाहे अदा आजमा ले ।।

दिल

रस्सी में तो जलकर भी हैं निशां बाकी, मगर उनका क्या होगा 'एहसास' जो  सिलवटें  दिलों में लिए फिरते हैं ।।

तोहमत

ख्वाबों में जीने की तोहमत तो मिली, 'एहसास' मगर हकीकत के फरेबों से यूं बच निकला मैं ।।

सत्य

सत्य अर्थात क्या ? क्या परिभाषा दी जाए इसकी, मेरी समझ से जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करना । यही सत्य है वैसे अटल जी के शब्दों में - जो है उसका होना सत्य है, जो नहीं है, उसका न होन...